Himachal Pradesh Budget 2026-27 में ₹54,928 करोड़ का ऐलान, स्वास्थ्य और शिक्षा पर फोकस
Himachal Pradesh सरकार ने Budget 2026-27 में ₹54,928 करोड़ का बजट पेश किया है। मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और पर्यटन सेक्टर पर खास ध्यान दिया है। वहीं विपक्ष ने इस बजट को घाटे वाला बताते हुए सवाल भी उठाए हैं, जिससे राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
Himachal Pradesh 2026 budget:
शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार, 21 मार्च 2026 को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। यह उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद का चौथा बजट है। इस बार के बजट को सरकार ने हिमाचल प्रदेश बजट को 'आत्मनिर्भर हिमाचल' की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। इस बजट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार इसका आकार पिछले साल से कम किया गया है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 का बजट 58,514 करोड़ रुपये का था, जो इस साल घटकर 54,928 करोड़ रुपये रह गया है। यानी करीब 3,586 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। सीएम सुक्खू ने इसकी वजह केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को बंद करना बताया। उन्होंने कहा कि RDG बंद होने से राज्य को हर साल करीब 8,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
बजट का आकार और आर्थिक हालात
बजट पेश करते हुए सीएम सुक्खू ने साफ कहा कि प्रदेश इस समय बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है। केंद्र से मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (RDG) अब पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे राज्य के खजाने पर भारी दबाव है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश बजट में इस बार राजस्व प्राप्तियां 40,361 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि राजस्व खर्च 46,938 करोड़ रुपये का है। यानी राजस्व घाटा करीब 6,577 करोड़ रुपये रहेगा। वहीं राज्य का राजकोषीय घाटा 9,698 करोड़ रुपये यानी राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का 3.49 फीसदी रहने का अनुमान है।आर्थिक तंगी के बावजूद सीएम सुक्खू ने यह भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन जैसे अहम क्षेत्रों में कोई कटौती नहीं की गई है। बल्कि इन सेक्टरों को और मजबूत बनाने पर फोकस किया गया है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए बड़ी घोषणाएं
सीएम सुक्खू ने इस बार के बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक हिमाचल प्रदेश बजट को 'आत्मनिर्भर' बनाना है। इसके लिए किसानों और पशुपालकों के लिए कई बड़े ऐलान किए गए:
· प्राकृतिक खेती से उगाई जाने वाली फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाया गया है।
· गेहूं का MSP 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो, मक्का 40 से 50 रुपये, हल्दी 90 से 150 रुपये और अदरक का MSP पहली बार 30 रुपये प्रति किलो तय किया गया है।
· दूध का समर्थन मूल्य भी बढ़ाया गया है। गाय के दूध का दाम 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये और भैंस के दूध का 61 से 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है।
· बीज उत्पादन के लिए 5,000 रुपये प्रति बीघा सब्सिडी देने का ऐलान किया गया है।
· डेयरी किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए ए2 दूध के लिए 100 रुपये प्रति लीटर का प्रीमियम मूल्य तय किया गया है।
· मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए नाव खरीदने और मछली परिवहन पर 70 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी। देहरा में एक मत्स्य केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।
गरीबों और महिलाओं के लिए राहत वाली योजनाएं
आर्थिक तंगी के बीच भी सरकार ने गरीबों और महिलाओं के कल्याण के लिए कई अहम योजनाओं का ऐलान किया है। 'मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना' के तहत 1 लाख अति गरीब परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया गया है। इन्हीं परिवारों की महिलाओं को 'इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि' योजना के तहत हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सीएम सुक्खू ने बताया कि प्रदेश में करीब 2.65 लाख बीपीएल परिवार हैं, और सरकार इनमें से सबसे गरीब परिवारों को चुनकर उन्हें सीधे कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ेगी।
मितव्ययिता के कड़े कदम: सीएम से लेकर अफसरों तक की सैलरी डेफर
आर्थिक संकट से निपटने के लिए सरकार ने मितव्ययिता के बड़े कदम उठाए हैं। सीएम सुक्खू ने घोषणा की कि वह खुद अपने वेतन का 50 फीसदी अगले छह महीने के लिए स्थगित (डेफर) कर रहे हैं। इसी तरह, डिप्टी सीएम और मंत्रियों का 30 फीसदी, विधायकों का 20 फीसदी और वरिष्ठ अधिकारियों का 30 फीसदी तक वेतन डेफर किया जाएगा। वहीं ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को इससे पूरी तरह छूट दी गई है। सीएम ने साफ किया कि यह वेतन कटौती नहीं है, बल्कि सिर्फ स्थगित किया जा रहा है। जैसे ही आर्थिक स्थिति सुधरेगी, यह राशि वापस कर दी जाएगी। इसके अलावा, विधायक क्षेत्र विकास निधि को भी घटाकर 2.20 करोड़ रुपये से 1.10 करोड़ रुपये प्रति विधायक कर दिया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं का होगा आधुनिकीकरण
स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजट में कई अहम घोषणाएं की गई हैं। आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज में पीईटी स्कैन और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं शुरू की जाएंगी। वहीं एम्स बिलासपुर में डिजिटल एंजियोग्राफी की सुविधा दी जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
शिक्षा के क्षेत्र में बड़े सुधार
शिक्षा के क्षेत्र में भी बजट में कई नए बदलाव किए गए हैं। उच्च शिक्षा में मल्टी-एंट्री-एग्जिट सिस्टम (MEES) जैसे सुधार लागू किए जाएंगे। इसके अलावा, प्रदेश के सरकारी स्कूलों को सीबीएसई पाठ्यक्रम से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल का निर्माण कार्य जल्द पूरा करने की बात कही गई है।
पर्यटन को बढ़ावा: कांगड़ा एयरो-सिटी और हेलिपैड
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बजट में कई अहम योजनाओं का ऐलान किया गया है। कांगड़ा एयरपोर्ट के पास 'कांगड़ा एयरो-सिटी' बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, सभी जिला मुख्यालयों पर हेलिपैड बनाए जाएंगे, जिससे दुर्गम इलाकों तक पहुंचना आसान होगा। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 250 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। मंडी स्थित शिव धाम का निर्माण कार्य भी पूरा किया जाएगा। कांगड़ा के बनखंडी में बनने वाले चिड़ियाघर के पास एक लायन सफारी भी शुरू करने की योजना है।
नई पहल: 'वन डिस्ट्रिक्ट थ्री प्रोडक्ट्स' योजना
हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जहां 'वन डिस्ट्रिक्ट थ्री प्रोडक्ट्स' योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत हर जिले के तीन स्थानीय उत्पादों को चिन्हित किया जाएगा और उनके ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर काम किया जाएगा। इससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पशुपालकों के लिए पहल: PEHEL योजना
प्रदेश के गड्डी, गुज्जर, किन्नौरा और अन्य पशुपालक समुदायों के लिए सरकार ने PEHEL (Pastoralists Empowerment in Himalayan Ecosystems for Livelihood) योजना शुरू की है। इसके तहत 40,000 से अधिक परिवारों को लाभ मिलेगा। हर पशुपालक को डिजिटल कार्ड दिया जाएगा, जिससे सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उन्हें मिल सकेगा। साथ ही उनके लिए जीवन बीमा की भी व्यवस्था की गई है।
पर्यावरण संरक्षण पर फोकस
'मिशन ग्रीन हिमाचल प्रदेश' के तहत राज्य के वन क्षेत्र को 29.5 फीसदी से बढ़ाकर 32 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 8,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में पौधारोपण किया जाएगा। इसके अलावा, 50 नए इको-टूरिज्म साइट विकसित करने की योजना है।
सीएम सुक्खू का बीजेपी पर निशाना
बजट भाषण के दौरान सीएम सुक्खू ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद करके केंद्र सरकार ने हिमाचल के साथ अन्याय किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुश्किल समय में बीजेपी ने प्रदेश का साथ नहीं दिया। इस पर बीजेपी विधायकों ने जमकर हंगामा किया और सदन के बीच में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि, इसके बावजूद सीएम सुक्खू ने अपना भाषण जारी रखा और बजट का बचाव किया।
राज्य की अर्थव्यवस्था के आंकड़े
बजट में पेश आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश बजट 2026-27 के दौरान राज्य की अर्थव्यवस्था 8.3 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) 2.54 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि प्रति व्यक्ति आय 2,83,626 रुपये रहेगी।
विभागवार बजट आवंटन
विभागवार बजट आवंटन की बात करें तो:
· शिक्षा क्षेत्र को सबसे ज्यादा 8,848.66 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
· स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के लिए 2,704.54 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
· पुलिस और संबद्ध संगठनों के लिए 1,748.39 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
· लोक निर्माण विभाग (सड़कें, पुल, भवन) को 3,521.02 करोड़ रुपये मिलेंगे।
· ग्रामीण विकास के लिए 1,686.27 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
· पर्यटन और नागरिक उड्डयन के लिए 276.96 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्ष के नेता और पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने बजट को "भ्रामक" बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बजट में विभागीय आवंटन में कटौती की गई है और पूंजीगत व्यय घटाया गया है। उन्होंने दावा किया कि राजस्व घाटा बढ़ रहा है और रोजगार के अवसर घट रहे हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश बजट 2026-27 आर्थिक तंगी के बावजूद जनता के कल्याण पर केंद्रित है। सरकार ने किसानों, महिलाओं, गरीबों, पशुपालकों और युवाओं के लिए कई अहम योजनाओं का ऐलान किया है। साथ ही मितव्ययिता के कड़े कदम उठाकर सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह मुश्किल समय में भी जनहित से समझौता नहीं करेगी। हालांकि, इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाता है और क्या सरकार आर्थिक संकट से उबर पाती है, यह आने वाला समय ही बताएगा।
