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Bilaspur AIIMS में नई मेडिकल सुविधाएँ शुरू – अब 5 नई स्पेशियलिटी OPD का लाभ मिलेगा

 बिलासपुर AIIMS में नई मेडिकल सुविधाएँ शुरू – अब 5 नई स्पेशियलिटी OPD का लाभ मिलेगा

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब इस संस्थान में 5 नई स्पेशलिटी ओपीडी (Outpatient Department) की शुरुआत की गई है, जिससे मरीजों को और भी बेहतर और विशेषज्ञ इलाज की सुविधा मिल सकेगी। यह पहल उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगी, जिन्हें अब तक गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए प्रदेश के बाहर जाना पड़ता था। आइए, इन नई सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।


परिचय

बिलासपुर एम्स में हाल ही में पांच नई स्पेशलिटी ओपीडी सेवाएं शुरू की गई हैं। इनमें फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (PMR), पल्मोनरी मेडिसिन, मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और न्यूक्लियर मेडिसिन जैसी महत्वपूर्ण विशेषज्ञताएं शामिल हैं। इन नई ओपीडी के शुरू होने से अब मरीजों को लकवा, फेफड़ों के रोग, पाचन तंत्र की गंभीर समस्याओं और कैंसर जैसी जटिल बीमारियों का इलाज घर के पास ही मिल सकेगा। यह सुविधाएं मुख्य रूप से 7 मार्च, 2025 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा राष्ट्र को समर्पित की गई थीं।

यह लेख इन नई चिकित्सा सुविधाओं के फायदे और उनसे जुड़ी सभी जरूरी जानकारी को बहुत ही सरल और दोस्ताना भाषा में बताएगा।

1. फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (PMR) – नई जिंदगी की ओर कदम

एम्स बिलासपुर में अब भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास (PMR) विभाग की ओपीडी शुरू कर दी गई है। यह उन मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है, जो लकवा, विकलांगता या पुराने दर्द से परेशान हैं।

किन मरीजों को होगा लाभ?

यह विभाग उन लोगों के लिए है, जिन्हें रीढ़ की हड्डी में चोट, गठिया, मांसपेशियों की कमजोरी, दुर्घटना के बाद की समस्याएं, या बच्चों में सेरेब्रल पाल्सी (मस्तिष्क पक्षाघात) है।

कब और कहां मिलेगी सेवा?

यह ओपीडी हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बी-ब्लॉक की चौथी मंजिल, कमरा नंबर B736 में चलती है। यहां डॉक्टरों और थेरेपिस्ट की एक पूरी टीम मरीजों का इलाज करती है।एक ही छत के नीचे सब कुछइस विभाग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीजों को फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी, दर्द प्रबंधन के साथ-साथ कृत्रिम अंग और ऑर्थोसिस (सहायक उपकरण) लगाने की सुविधा एक ही जगह पर मिल जाती है।

क्यों है यह जरूरी?

पीएमआर विभाग का मुख्य लक्ष्य मरीजों को फिर से आत्मनिर्भर बनाना है। डॉक्टर और थेरेपिस्ट मरीज के लिए एक पर्सनल ट्रीटमेंट प्लान बनाते हैं, जिससे वे धीरे-धीरे अपनी दिनचर्या के काम फिर से करने लायक बन जाते हैं। यह विभाग उन लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करेगा, जो लंबे समय से बीमारी की वजह से घरों में कैद थे।

2. पल्मोनरी मेडिसिन – फेफड़ों के मरीजों के लिए राहत

पल्मोनरी मेडिसिन यानी फेफड़ों के रोगों के इलाज का विभाग भी एम्स बिलासपुर में शुरू हो गया है। यह उन मरीजों के लिए राहत लेकर आया है, जो अस्थमा, टीबी (तपेदिक), सांस लेने में तकलीफ या फेफड़ों से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं।पहले फेफड़ों के गंभीर रोगियों को चंडीगढ़ या दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता था। अब उन्हें बिलासपुर एम्स में ही स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से सलाह और इलाज मिल सकेगा। यह विभाग फेफड़ों की बीमारियों का सही और समय पर निदान करने के लिए अत्याधुनिक मशीनों से लैस है।

3. मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी – पेट और पाचन तंत्र का सुपर स्पेशलिस्ट इलाज

मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों का इलाज करता है। इसमें पेट, लीवर (यकृत), गॉल ब्लैडर (पित्ताशय), पैंक्रियाज (अग्न्याशय), छोटी और बड़ी आंत से जुड़ी सभी समस्याओं का उपचार किया जाता है।यह ओपीडी उन मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है, जिन्हें एसिडिटी, पेट के अल्सर, लीवर सिरोसिस, हेपेटाइटिस या पाचन संबंधी कोई जटिल बीमारी है। अब उन्हें महंगे प्राइवेट हॉस्पिटलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एम्स में यह सेवा पूरी तरह से सस्ती और विश्वसनीय है।

4. सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी – जटिल ऑपरेशनों की सुविधा

जहां मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में दवाओं और गैर-सर्जिकल तरीकों से इलाज किया जाता है, वहीं सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में पाचन तंत्र के जटिल ऑपरेशन किए जाते हैं। इसमें लीवर ट्रांसप्लांट, पैंक्रियाज का ऑपरेशन, पेट और आंतों के ट्यूमर को हटाना जैसी सर्जरी शामिल हैं।बिलासपुर एम्स में यह सुविधा शुरू होने से अब मरीजों को गंभीर सर्जरी के लिए दिल्ली या अन्य राज्यों में भटकना नहीं पड़ेगा। इस विभाग में अनुभवी सर्जन मौजूद हैं जो आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके मरीजों का सुरक्षित इलाज करते हैं।

5. न्यूक्लियर मेडिसिन – कैंसर और थायराइड की सटीक जांच

न्यूक्लियर मेडिसिन एक अत्याधुनिक तकनीक है जिसका इस्तेमाल कैंसर, थायराइड, हड्डियों और दिल से जुड़ी बीमारियों के सटीक निदान और इलाज के लिए किया जाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 7 मार्च, 2025 को इस सुविधा का उद्घाटन किया था।

कितना खर्च आया?

इस अत्याधुनिक सुविधा को स्थापित करने में लगभग 30.43 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसमें पीईटी/सीटी, एसपीईसीटी/सीटी और लो-डोज थेरेपी (एलडीटी) वार्ड जैसी आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं।

किन बीमारियों का इलाज होगा?

इस सुविधा से थायराइड कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, न्यूरो-एंडोक्राइन कैंसर के मरीजों को लो-डोज रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी दी जा सकेगी। इसके अलावा, किडनी, लीवर, हड्डियों, थायराइड और दिल की जांच के लिए भी यहां रेडियोफार्मास्यूटिकल्स तैयार किए जा सकेंगे।

AIIMS बिलासपुर की अन्य उपलब्धियां और सुविधाएं

बिलासपुर एम्स में केवल ये पांच नई ओपीडी ही नहीं, बल्कि और भी कई आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। आइए, एक नजर डालते हैं संस्थान की अन्य प्रमुख सेवाओं पर:

सुविधा का नाम विवरण

AI-आधारित ECG एम्स बिलासपुर देश का पहला केंद्रीय सरकारी अस्पताल है जहां AI आधारित कार्डिया 12-लीड ECG सिस्टम लगाया गया है। यह हार्ट अटैक के 'गोल्डन ऑवर' में तुरंत जांच कर इलाज शुरू करने में मदद करता है।ट्रॉमा सेंटर 350 करोड़ रुपये की लागत से 300 बेड का ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी ब्लॉक बनाने की मंजूरी मिल चुकी है। इसमें हेलीपैड, बर्न यूनिट और ट्रॉमा ICU की सुविधा होगी।भारी संख्या में बेड वर्तमान में एम्स में 750 बेड हैं, जिसमें 64 ICU बेड शामिल हैं। हर दिन औसतन 1500 से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं।किडनी ट्रांसप्लांट संस्थान में अब तक 8 सफल किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।सस्ती दवाएं अमृत फार्मेसी में मरीजों को 50 प्रतिशत से अधिक छूट पर जीवन रक्षक दवाएं मिलती हैं। यह देश की 225वीं अमृत फार्मेसी है।मुफ्त इलाज अब तक 20,000 से अधिक मरीजों को हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज मिल चुका है।

नई ओपीडी का असर: मरीजों को क्या फायदा होगा?

इन पांच नई ओपीडी के शुरू होने से प्रदेश की जनता को बहुत बड़ी राहत मिली है। पहले जटिल बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को पीजीआई चंडीगढ़ या एम्स दिल्ली जाना पड़ता था, जहां इलाज के साथ-साथ रहने-खाने का भी खर्च बहुत ज्यादा आता था।अब वे सभी सुविधाएं बिलासपुर एम्स में ही उपलब्ध हो गई हैं। इससे मरीजों का पैसा और समय दोनों बचेगा। साथ ही, गंभीर मरीजों को लंबी दूरी तय करने में होने वाली परेशानियों से भी निजात मिलेगी।खास बात यह है कि एम्स में सभी सेवाएं सरकारी दरों पर बहुत ही सस्ते दामों पर उपलब्ध कराई जाती हैं। गरीब से गरीब व्यक्ति भी यहां अपना इलाज करा सकता है।

निष्कर्ष

बिलासपुर एम्स लगातार हिमाचल प्रदेश और आसपास के राज्यों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का एक मजबूत केंद्र बनता जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के मार्गदर्शन में यहां लगातार नई-नई सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं। फिजिकल मेडिसिन, पल्मोनरी मेडिसिन, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (मेडिकल और सर्जिकल) और न्यूक्लियर मेडिसिन जैसे विभागों की ओपीडी शुरू होना एक ऐतिहासिक कदम है।

यह पहल न केवल बिलासपुर बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश और पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा के लोगों के लिए वरदान साबित होगी। अब लोगों को महंगे प्राइवेट हॉस्पिटलों की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही उन्हें इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों में भटकना पड़ेगा। एम्स बिलासपुर ने साबित कर दिया है कि वह 'सबके लिए सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं' के सपने को साकार करने में जुटा है।

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