हमीरपुर-ऊना रेल परियोजना में तेज़ी – रेलवे ने टनल व ब्रिज निर्माण का नया टाइमलाइन जारी किया
हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों के लिए यह रेल परियोजना किसी वरदान से कम नहीं है। लंबे समय से प्रतीक्षित हमीरपुर-ऊना रेल परियोजना में अब रेलवे ने तेजी ला दी है। हालाँकि, इस परियोजना को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें सबसे बड़ी चुनौती है भूमि अधिग्रहण और राज्य सरकार से सहयोग न मिलना। आइए, इस परियोजना की पूरी कहानी और नवीनतम अपडेट को विस्तार से समझते हैं।
कौन सी रेल परियोजनाएं हैं और कितना बजट है?
हिमाचल प्रदेश में फिलहाल तीन बड़ी रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन तीनों परियोजनाओं की कुल लंबाई लगभग 214 किलोमीटर है और इन पर करीब 17,622 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
पहली परियोजना: भानुपली-बिलासपुर-बेरी रेल लाइन
यह परियोजना काफी अहम है क्योंकि यह हिमाचल को पंजाब से जोड़ती है। अब तक इस पर करीब 5,252 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इस परियोजना में राज्य सरकार को अपना हिस्सा भी देना है, जो करीब 1,843 करोड़ रुपये है, लेकिन यह राशि अभी तक नहीं दी गई है।
दूसरी परियोजना: नंगल-ऊना-तलवाड़ा-मुकेरियां रेल लाइन
यह वही परियोजना है जो हमीरपुर और ऊना को जोड़ेगी। इसी परियोजना के तहत सुरंगों और पुलों का निर्माण होना है। इस परियोजना का एक हिस्सा (नंगल डैम से अंदौरा तक) पहले से चालू है और वंदे भारत ट्रेन भी अंदौरा तक चलती है। लेकिन आगे का हिस्सा (दौलतपुर चौक से तलवाड़ा तक) अभी अधूरा है।
तीसरी प्रस्तावित परियोजना: बिलासपुर-मनाली-लेह रेल कॉरिडोर
यह एक बहुत बड़ी और रणनीतिक परियोजना है। इसका सर्वे और डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) पूरा हो चुका है। इस पर करीब 1.31 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। रक्षा मंत्रालय ने इसे रणनीतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण बताया है।
अब तक कितना काम हुआ है?
रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, तीनों परियोजनाओं पर अब तक करीब 8,280 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और लगभग 64 किलोमीटर का रेलवे ट्रैक चालू हो चुका है। लेकिन जहां तक हमीरपुर-ऊना रेल लाइन का सवाल है, यहाँ प्रगति काफी धीमी है।सांसद अनुराग ठाकुर ने बताया कि कारटोली-तलवाड़ा खंड पर केवल 25 प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है। वहीं तलवाड़ा-मुकेरियां खंड पर पुलों का काम लगभग 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है, लेकिन वन स्वीकृतियाँ न मिलने के कारण काम रुका हुआ है।
क्यों हो रही है देरी? मुख्य समस्याएं क्या हैं?
इस परियोजना में देरी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें हैं:पहली वजह: भूमि अधिग्रहण की समस्या
रेल लाइन बनाने के लिए जमीन की जरूरत होती है। इस पूरे कॉरिडोर के लिए 278 हैक्टेयर जमीन चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 189 हैक्टेयर जमीन ही अधिग्रहित हो पाई है। इसी तरह भानुपली-बिलासपुर-बेरी लाइन के लिए 124 हैक्टेयर जमीन चाहिए थी, जिसमें से सिर्फ 82 हैक्टेयर ही मिल पाई है। जमीन न होने पर निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सकता।
दूसरी वजह: राज्य सरकार का सहयोग न मिलना
सांसद अनुराग ठाकुर का आरोप है कि हिमाचल प्रदेश और पंजाब की राज्य सरकारें इस परियोजना में आवश्यक सहयोग नहीं दे रही हैं। भूमि हस्तांतरण में देरी, वन स्वीकृतियाँ न मिलना, और राज्य के हिस्से के पैसे न देने से परियोजना की प्रगति धीमी हो रही है।
तीसरी वजह: वन स्वीकृतियों में अटका काम
पंजाब के होशियारपुर जिले में 132 हैक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन (दूसरे काम के लिए इस्तेमाल) से जुड़े मामले लंबित हैं। जब तक ये स्वीकृतियाँ नहीं मिलतीं, तब तक वहाँ निर्माण कार्य संभव नहीं है।
यह रेल लाइन क्यों है इतनी जरूरी?
आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ एक रेल लाइन के लिए इतना हंगामा क्यों? तो आइए जानते हैं इसकी अहमियत:आम लोगों के लिए राहत: अभी हमीरपुर और ऊना के बीच सड़क मार्ग से सफर करने में काफी समय लगता है। रेल लाइन बनने से यह दूरी घटकर डेढ़ से दो घंटे में पूरी हो जाएगी।रणनीतिक महत्व: यह रेल लाइन पठानकोट-जम्मू मार्ग का एक विकल्प प्रदान करती है। सेना के लिए यह बहुत जरूरी है क्योंकि अगर एक रास्ता बंद हो जाए तो दूसरा रास्ता खुला रहेगा।व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा: इस रेल लाइन से किसानों और व्यापारियों को अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी। साथ ही, पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
रेलवे की नई योजना और समयसीमा क्या है?
देरी के बावजूद, रेलवे ने अब काम को तेज करने की नई योजना बनाई है। सांसद अनुराग ठाकुर ने सुझाव दिया है कि केंद्र, राज्य सरकार और रेलवे के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक संयुक्त निगरानी तंत्र बनाया जाए। यह तंत्र हर पखवाड़े (15 दिन में) बैठक करेगा और लक्ष्य के अनुसार प्रगति की समीक्षा करेगा।
सुरंगों और पुलों पर तेजी लाने की योजना:
रेलवे ने उन्नत तकनीकों जैसे न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का इस्तेमाल करने का फैसला किया है, जिससे सुरंगों का निर्माण तेजी से हो सके। इसके अलावा, जहाँ जमीन मिल चुकी है, वहाँ पुलों के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है।
नया लक्ष्य:
हालाँकि कोई आधिकारिक नई डेडलाइन सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन रेलवे कोशिश कर रहा है कि:
· सबसे लंबी सुरंग का ब्रेक थ्रू (दोनों तरफ से खुदाई मिलना) अगले 6-8 महीनों में हो जाए
· तलवाड़ा-मुकेरियां खंड को जल्द से जल्द चालू किया जाए
· वन स्वीकृतियाँ मिलते ही होशियारपुर के हिस्से में काम शुरू कर दिया जाए
अब आगे क्या होगा? उम्मीद की किरण
हालाँकि इस परियोजना में काफी देरी हुई है, लेकिन अब नई उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार ने रेलवे अवसंरचना के लिए बजट काफी बढ़ा दिया है। सांसद अनुराग ठाकुर ने बताया कि पंजाब में रेलवे के लिए बजट 2009-14 में सिर्फ 225 करोड़ रुपये सालाना था, जो अब बढ़कर 2025-26 में 5,421 करोड़ रुपये हो गया है। यह दिखाता है कि केंद्र सरकार इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए गंभीर है।सांसद ने राज्य सरकारों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द भूमि हस्तांतरण करें, वन स्वीकृतियाँ दें और मुआवजा वितरण से जुड़ी सभी रुकावटें दूर करें। अगर राज्य सरकारें सहयोग करें, तो यह परियोजना जल्द पूरी हो सकती है।
स्थानीय लोगों की राय और उम्मीदें
हमीरपुर और ऊना के लोगों के लिए यह रेल लाइन सपने जैसी है। कई सालों से वे इसका इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि रेल लाइन बनने से उनके व्यापार में बढ़ोतरी होगी। किसानों को लगता है कि वे अपनी उपज जल्दी और सस्ते में बाजार तक पहुँचा सकेंगे।हालाँकि, भूमि अधिग्रहण के मामले में कुछ लोगों को मुआवजा कम मिलने की शिकायत भी है, लेकिन अधिकांश लोग इस परियोजना के पक्ष में हैं। उन्हें उम्मीद है कि अब रेलवे और राज्य सरकार मिलकर जल्द ही इस परियोजना को पूरा करेंगे।
निष्कर्ष
हमीरपुर-ऊना रेल परियोजना हिमाचल प्रदेश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह न सिर्फ आम लोगों की यात्रा को सुगम बनाएगी, बल्कि देश की सुरक्षा के लिहाज से भी यह एक रणनीतिक परियोजना है। हालाँकि भूमि अधिग्रहण और राज्य सरकार के सहयोग न करने के कारण इसमें देरी हुई है, लेकिन अब रेलवे ने काम को तेज करने की नई योजना बनाई है।
सांसद अनुराग ठाकुर ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया है और संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने का सुझाव दिया है। अब जरूरत है राज्य सरकारों के सहयोग की। अगर सब मिलकर काम करें तो यह परियोजना जल्द पूरी हो सकती है और हिमाचल के लोगों का सालों पुराना सपना साकार हो सकता है।आशा है कि रेलवे द्वारा जारी नई समयसीमा और काम में आई तेजी से यह परियोजना जल्द ही पूरी होगी और हिमाचल के विकास की रफ्तार को और बढ़ाएगी।
