Haripurdhar Bus Accident – Bus Fell into 500ft Gorge
Himachal Pradesh के Haripurdhar village के पास आज एक बड़ा सड़क हादसा हुआ जब एक bus 500-foot गहरी gorge में जा गिरी।
स्थानीय प्रशासन और rescue टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गई हैं और बचाव कार्य जारी है।
घटना से इलाके में यातायात प्रभावित हुआ है और घायल लोगों को नजदीकी अस्पताल भेजा गया है।
दर्द की वो दोपहर – कैसे हुआ हादसा?
9 जनवरी 2026, दोपहर करीब 11:45 बजे। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले का हरिपुरधार इलाका अचानक चीख-पुकार से गूंज उठा। शिमला से कुपवी जा रही एक निजी बस ने पहाड़ी सड़क पर संतुलन खो दिया और करीब 500 फुट गहरी खाई में जा गिरी।
यह बस पक्के शेड्यूल पर चल रही थी। उसका रूट था — शिमला से सोलन, राजगढ़, नोहरधार, हरिपुरधार होते हुए कुपवी तक। सड़क बेहद संकरी थी, हरिपुरधार बाजार से करीब 100 मीटर पहले एक तेज मोड़ पर यह दर्दनाक हादसा हुआ।
बस गहरी खाई में उल्टी जा गिरी, जिससे बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया। एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग सबसे पहले मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू में जुट गए।
यह बस, ‘जीत कोच’ नाम से चलती थी, जिसमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सवार थे। कई लोग त्योहार मनाने अपने गांव लौट रहे थे।
तत्काल राहत और बचाव कार्य — कैसे हुआ रेस्क्यू?
हादसे की खबर लगते ही आपदा राहत टीमों में हड़कंप मच गया। संगड़ाह के एसडीएम सुनील कायथ ने बताया कि युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया था।
देखते ही देखते स्थानीय लोग, पुलिस, एसडीआरएफ की टीमें और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
इन्होंने कैसे किया रेस्क्यू?
· सबसे पहले स्थानीय ग्रामीण रस्सियों की मदद से खाई में उतरे और घायलों को बाहर निकाला। कई लोगों ने अपने घरों से कंबल और पानी लाकर जरूरतमंदों तक पहुंचाया।
· फिर पुलिस और एसडीआरएफ ने सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया। बस के मलबे में फंसे लोगों को निकाला जा रहा था।
· अंत में घायलों को तुरंत हरिपुरधार अस्पताल, दड़ाहू अस्पताल, संगड़ाह अस्पताल और नाहन मेडिकल कॉलेज पहुंचाया जाता रहा। कई गंभीर घायलों को आईजीएमसी शिमला भी रेफर किया गया।
सिरमौर की डीसी प्रियंका वर्मा ने मीडिया को बताया कि रेस्क्यू टीमों ने कड़ी मेहनत से घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रशासन ने घायलों को तत्काल 5-5 हजार रुपये की राहत राशि भी दी।
मृतकों की संख्या 14 — 39 सीटर बस में सवार थे कितने लोग?
शुरुआती रिपोर्ट्स में मौतों की संख्या 8 बताई गई थी, लेकिन जैसे-जैसे घायलों की हालत बिगड़ी, मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता गया। रात होते-होते यह संख्या 14 पहुंच गई। इनमें 8 महिलाएं और एक 6 महीने की मासूम बच्ची भी शामिल थी। इस हादसे में करीब 52 लोग घायल हुए, जिनमें से 3 की हालत गंभीर बताई गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि बस सिर्फ 39 सीटर थी, लेकिन उसमें 66 से लेकर 75 यात्री सवार थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक बस 75 लोगों से भरी हुई थी। यानी तय क्षमता से लगभग दोगुना सवारी।
हादसे में बस का ड्राइवर भी मारा गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया और PM नेशनल रिलीफ फंड से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने का ऐलान किया।
जांच का आदेश और पुलिस एफआईआर — क्या निकला सामने?
इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद सवाल उठा — आखिर बस खाई में क्यों जा गिरी?
· मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि उस दिन सड़क पर पाला (frost) जमा हुआ था। शायद इसी वजह से बस फिसल गई।
· उपमुख्यमंत्री मुखेश अग्निहोत्री ने मजिस्ट्रेटियल जांच के आदेश दे दिए। एसडीएम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई, जिसमें मैकेनिकल एक्सपर्ट और पुलिस प्रतिनिधि शामिल थे।
· 10 जनवरी को पुलिस ने ड्राइवर के खिलाफ लापरवाही से मौत का केस दर्ज किया।
5 फरवरी 2026 की जांच रिपोर्ट — चौंकाने वाले खुलासे
जांच रिपोर्ट 5 फरवरी 2026 को तैयार हो गई। इसे डायरेक्टर ट्रांसपोर्ट हिमाचल प्रदेश भेज दिया गया।
रिपोर्ट में क्या निकलकर आया?
· ओवरलोडिंग — सबसे बड़ी वजह। 39 सीटर बस में 75 लोग सवार थे। अतिरिक्त भार से बस का मैकेनिकल सिस्टम फेल हो गया और संतुलन बिगड़ गया।
· ड्रेनेज बंद — हादसे वाली जगह पर सड़क किनारे निकासी बंद थी, जिससे पानी जमा होकर पाला बन गया और बस फिसल गई।
· ड्राइवर और कंडक्टर के लाइसेंस एक्सपायर — जांच में यह भी पाया गया कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर के लाइसेंस हादसे के समय एक्सपायर हो चुके थे।
64 साल पुरानी सड़क — जिसने मौत को दावत दी
द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिस सड़क पर यह हादसा हुआ, वह 1958-1962 के बीच बनी थी। यानी 64 साल पुरानी सड़क पर आज भी वही हालत है — चौड़ाई सिर्फ 4 से 5 मीटर, कोई क्रैश बैरियर नहीं, कोई वॉर्निंग साइन नहीं।
यह सड़क ट्रांस-गिरि क्षेत्र के 2 लाख से अधिक लोगों की जीवन रेखा है, लेकिन बार-बार होने वाले हादसों ने इसे ‘मौत का रास्ता’ बना दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह त्रासदी टलने वाली नहीं थी। एक रहवासी रमेश चौहान ने बताया, “इस सड़क पर दो गाड़ियां एक साथ सुरक्षित नहीं गुजर सकतीं। एक छोटी सी चूक और गाड़ी सीधे खाई में।”
राजनीतिक और प्रशासनिक कार्रवाई — सरकार ने क्या कदम उठाए?
· मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हादसे पर गहरा दुख जताया और सभी पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद देने के निर्देश दिए।
· उपमुख्यमंत्री मुखेश अग्निहोत्री ने खुद हादसे वाली जगह का दौरा किया और अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना।
· सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिजनों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 5-5 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता का ऐलान किया।
· प्रशासन ने हादसे के बाद उसी रास्ते पर गश्त बढ़ा दी और भारी वाहनों की चेकिंग तेज कर दी।
क्या सीख मिलती है इस हादसे से?
हरिपुरधार बस हादसा सिर्फ एक बस दुर्घटना की कहानी नहीं है। यह उन लोगों की दास्तान है, जो बस में सवार थे और जिनमें से कई वापस नहीं लौटे।
हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में सुरक्षित सफर हर किसी का हक है, लेकिन हम देख रहे हैं:
· अनदेखी की गई पुरानी सड़कें।
· ओवरलोडिंग की आदत।
· लाइसेंस एक्सपायर होने के बाद भी वाहन चलाना।
· कोई क्रैश बैरियर, कोई दीवार, कोई सुरक्षा कवच नहीं।
हालाँकि, अब कार्रवाई शुरू हो चुकी है। जांच रिपोर्ट ट्रांसपोर्ट डायरेक्टर के पास भेजी जा चुकी है। आने वाले दिनों में और सख्त कदम उठाए जाएंगे, इसकी उम्मीद की जा सकती है।
आइए, एक प्रार्थना करें — उन 14 जानों की आत्मा की शांति के लिए और घायलों की जल्द से जल्द सेहत के लिए।
निष्कर्ष — एक दर्द जो भुलाया नहीं जा सकता
जो लोग उस बस में सवार थे, उनमें से कई के पास लौटने के लिए अपने परिवार थे। लेकिन 14 परिवार बिखर गए। एक छह महीने की मासूम बच्ची ने दुनिया देखने से पहले ही दुनिया को अलविदा कह दिया।
क्या कभी यह हादसा टल सकता था? हो सकता है — अगर बस ओवरलोड न होती, अगर उस सड़क पर क्रैश बैरियर होते, अगर ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस होता।
लेकिन ‘अगर’ का कोई मोल नहीं होता। बस एक सबक बचता है — सुरक्षा से कोई समझौता नहीं।
हरिपुरधार का यह हादसा हम सबके लिए एक चेतावनी है। आइए, हम अपने आसपास नजर दौड़ाएं — कहीं हम भी तो उसी लापरवाही का हिस्सा तो नहीं जो हादसों को न्योता देती है।
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