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Old Pension Scheme Update: कर्मचारियों के लिए क्या बदला? राज्य सरकारों के ताज़ा फैसले

Old Pension Scheme Latest Update: राज्यों में लागू स्थिति और सरकारी रुख Old Pension Scheme


(OPS) को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। कई राज्यों ने इसे लागू किया है, जबकि कुछ राज्यों में अभी भी इस पर विचार चल रहा है। कर्मचारियों के लिए यह बड़ा मुद्दा बना हुआ है, क्योंकि OPS सीधे उनकी retirement security से जुड़ा है।

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OPS Update 2026: Old Pension Scheme Latest News


ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) अपडेट: कर्मचारियों के लिए क्या बदला? जानिए राज्य सरकारों के ताज़ा फैसले

बदलती पेंशन व्यवस्था और बढ़ती माँग

पिछले कुछ सालों में पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। सरकारी कर्मचारी लगातार पुरानी व्यवस्था को वापस लाने की माँग कर रहे हैं। 2004 के बाद से देश में नई पेंशन योजना (NPS) लागू की गई थी, जहाँ कर्मचारी के वेतन का एक हिस्सा मार्केट लिंक्ड फंड में जाता है। लेकिन OPS में कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी आखिरी सैलरी की 50 फीसदी पेंशन और महंगाई भत्ते का लाभ पाने का हकदार होता था।

इस बीच, कई राज्य सरकारों ने OPS को वापस लाने के फैसले कर लिए हैं और कुछ राज्य इस पर विचार कर रहे हैं। इसलिए आज हम जानेंगे कि Old Pension Scheme Update के तहत कर्मचारियों के लिए क्या बदला और विभिन्न राज्यों के ताज़ा फैसले क्या हैं?

केंद्र सरकार ने क्या साफ किया?


केंद्र सरकार अभी तक OPS को राष्ट्रीय स्तर पर बहाल करने के पक्ष में नहीं है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 30 दिसंबर, 2025 को साफ तौर पर कहा था कि एनपीएस और यूनिफाइड पेंशन योजना के तहत आने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम शुरू करने की कोई योजना नहीं है。 इसके बजाय, सरकार ने 2025 की शुरुआत में यूनिफाइड पेंशन योजना (UPS) लागू की, जो कर्मचारियों को 50% गारंटीड पेंशन वाला मॉडल देती है। इसके अलावा, New Pension Scheme Rules 2026 के तहत कर्मचारियों के वेतन से अब 10% कटौती की जाएगी, जबकि सरकार उसमें 14% का योगदान देगी। यानी केंद्रीय कर्मचारी अब नई एनपीएस नियमों के तहत काम करेंगे, लेकिन OPS की बहाली की माँग करने वालों को अभी निराशा हाथ लगी है।

राज्य सरकारों के ताज़ा फैसले – कौन कहाँ है?


हालाँकि, राज्य स्तर पर कई सरकारों ने अलग रास्ता अपनाया है। आइए, नज़र डालते हैं कि विभिन्न राज्यों ने क्या ताज़ा फैसले किए हैं।

1. छत्तीसगढ़ – बड़ी तैयारी जारी


छत्तीसगढ़ ने पहले ही OPS को फिर से लागू करने का फैसला किया था। अब, सरकार ने इसे और मज़बूत बनाने के लिए पेंशन निधि नियम 2026 लागू किया है, जो राज्य में कार्यरत लगभग चार लाख OPS कर्मियों के लिए बनाया गया है। सरकार भविष्य के पेंशन भुगतान के दबाव को कम करने के लिए अभी एक सेपरेट फंड तैयार कर रही है, जिसे सुरक्षित निवेशों में रखा जाएगा। 15 फरवरी 2026 तक ही इस पेंशन निधि में 1068 करोड़ रुपए जमा कराए जा चुके हैं。


वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में बताया कि 2 लाख 91 हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने NPS की जगह OPS को चुना है। वहीं, सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया – 1 अगस्त से राज्य में एकीकृत पेंशन योजना (UPS) लागू कर OPS को समाप्त कर दिया गया।

2. राजस्थान – CAG की कड़ी नज़र


राजस्थान में OPS सिर्फ कर्मचारियों की माँग नहीं बल्कि अब वित्तीय जांच का विषय भी बन गया है। 2022 में तत्कालीन सरकार ने OPS को बहाल किया था। अब, CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) ने राजस्थान सरकार को एक नोटिस जारी कर अगले 10 वर्षों में OPS के कारण पड़ने वाले आर्थिक बोझ का अनुमान माँगा है। यह रिपोर्ट FRBM एक्ट के तहत माँगी गई है, जो यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सरकारी खजाने पर अत्यधिक दबाव न पड़े।


3. तमिलनाडु – नया प्रयोग



तमिलनाडु सरकार ने 23 साल पुरानी पेंशन प्रणाली को बदलते हुए एक नई स्कीम लागू की है। 1 जनवरी 2026 से, राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए तमिलनाडु एश्योर्ड पेंशन स्कीम (TAPS) लागू कर दी गई है। यह योजना कर्मचारियों को उनकी अंतिम सैलरी का 50% एश्योर्ड पेंशन का लाभ देती है। हालाँकि, इसमें NPS की तरह ही कर्मचारियों को 10% कंट्रीब्यूशन करना होता है। यह OPS और NPS का एक हाइब्रिड मॉडल है।


4. तमिलनाडु में चुनावी वादा



तमिलनाडु की राजनीति में OPS एक मुद्दा बन गया है। TVK प्रमुख विजय ने अपने पार्टी के घोषणापत्र में OPS को पुनर्गठित करने और 20 साल की सेवा पर 15 लाख रुपये की सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी देने का वादा किया था।


5. पंजाब – आंदोलन और विरोध


पंजाब के होशियारपुर में भी 26 अप्रैल, 2026 को सरकारी कर्मचारियों ने “ऑल्ड पे स्केल, ऑल्ड पेंशन एंड अलाउंस रिस्टोरेशन फ्रंट” के बैनर तले एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए NPS को खत्म कर OPS को बहाल करने की माँग की। अब ये कर्मचारी 17 मई, 2026 को मोहाली में प्रदेश स्तरीय रैली करने और फिर चंडीगढ़ में सीएम रेजिडेंस की तरफ मार्च करने का एलान किया है।


6. अन्य राज्य – सूची और माँग


अभी तक राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश – ये पाँच राज्य औपचारिक रूप से OPS को फिर से लागू कर चुके हैं। वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में कर्मचारी संगठन लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
राज्य OPS स्थिति
राजस्थान लागू
छत्तीसगढ़ लागू
पंजाब लागू
हिमाचल प्रदेश लागू
अन्य राज्य विचाराधीन / लागू नहीं

अदालती फैसलों का असर – 8वें वेतन आयोग पर निगाहें


OPS की बहाली के लिए यह जरूरी नहीं कि सिर्फ सरकारी आदेश ही काम करें। न्यायिक प्रक्रिया भी इसे तेज कर सकती है।

· छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक शिक्षक की याचिका पर सरकार की अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि पूर्व सेवा को अनदेखा करना न्यायसंगत नहीं है।
· वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने OPS मामले में सिंगल जज के फैसले पर रोक लगा दी, जिससे NPS वाले कर्मचारियों को राहत नहीं मिल पाई。

अब सबकी नज़र 8वें वेतन आयोग पर है। अगर 8वां वेतन आयोग पुरानी पेंशन को बहाल करने की सिफारिश करता है, तो यह केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों को बड़ी राहत दे सकता है。 अगर ऐसा होता है, तो राज्यों पर भी दबाव और बढ़ जाएगा।

निष्कर्ष – आगे क्या?


Old Pension Scheme Update 2026 साफ करता है कि हालाँकि केंद्र सरकार ने UPS और NPS में सुधार करके OPS की जगह ले ली है, लेकिन बड़े राज्य अब अकेले फैसले लेने को मजबूर हैं। कर्मचारियों की मांग OPS की 100% बहाली की है, जबकि सरकारों का तर्क है कि इससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा और विकास कार्यों में बाधा आएगी।

फिलहाल आने वाले कुछ महीनों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें इस दिशा तय करेंगी। अभी के लिए कर्मचारी आंदोलित हैं, और राज्य सरकारें दुविधा में हैं। इस विषय पर सबसे ताज़ा जानकारी के लिए, सरकारी वेबसाइटों और विश्वसनीय खबरों पर नज़र बनाए रखना ज़रूरी है।

Old Pension Scheme (OPS) – FAQs

OPS एक गारंटीड पेंशन व्यवस्था है जिसमें रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन मिलती है।
OPS में फिक्स पेंशन मिलती है, जबकि NPS मार्केट-आधारित है और पेंशन गारंटीड नहीं होती।
राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में OPS लागू है।
अभी तक केंद्र सरकार ने OPS को लागू करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
राज्यों की समीक्षा जारी है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई नया बड़ा बदलाव घोषित नहीं हुआ है।
कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आजीवन फिक्स पेंशन मिलती है, और आर्थिक सुरक्षा बढ़ती है।
OPS में DA और वेतन संशोधन के अनुसार पेंशन समय-समय पर बढ़ती रहती है।
OPS केवल उन कर्मचारियों पर लागू होती है जिन्हें राज्य सरकारों ने इसके अंतर्गत शामिल किया है।
कई राज्यों में OPS लागू हो चुकी है, और अन्य राज्य भी मांग पर विचार कर रहे हैं।
पेंशन अंतिम महीने के वेतन और सेवा अवधि के आधार पर तय की जाती है।
यह राज्य सरकार के आदेशों के अनुसार होता है। कई राज्यों में कर्मचारी आवेदन कर सकते हैं।
हाँ, OPS में सरकार सीधे पेंशन देती है; फंड मार्केट में निवेश नहीं होते।
OPS लागू करने से सरकार की पेंशन लागत बढ़ती है, जिस पर कई विशेषज्ञ चिंता जताते हैं।
अब तक कोई नई बड़ी टिप्पणी नहीं आई है; पुरानी याचिकाएँ लंबित हैं।
कर्मचारी यूनियनें, शिक्षक संगठन और कुछ राजनीतिक दल लंबे समय से OPS की मांग कर रहे हैं।
हाँ, OPS के तहत परिवार पेंशन की व्यवस्था भी शामिल है।
जो कर्मचारी गारंटीड पेंशन चाहते हैं, उनके लिए OPS बेहतर माना जाता है। NPS मार्केट आधारित लाभ देता है।
नहीं, OPS केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए है।
यह राज्य सरकार की नीति पर निर्भर करता है। कई जगह पुरानी तारीख से भी लाभ दिया गया है।
बजट सत्र और राज्य सरकार की बैठकों में कोई भी नया फैसला लिया जा सकता है।

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